भुजंगासन (Cobra Pose): कमर दर्द से राहत पाने का सही तरीका, लाभ और सावधानियां


कमर दर्द से राहत पाने के लिए भुजंगासन कैसे करें ? जानें । 

1.  प्रस्तावना: भुजंगासन क्या है और इसका महत्व।
2.     Step-by-Step विधि: भुजंगासन करने का सही तरीका।
3.  भुजंगासन के पूरक आसन-शशकासन,शलभासन,धनुरासन,मर्कट आसन, मार्जरी  
4.     कमर दर्द पर असर: यह आसन पीठ दर्द में कैसे काम करता है?
5.     सावधानियां: किन स्थितियों में यह आसन नहीं करना चाहिए?
6.     सहायक योगासन: कमर दर्द के लिए अन्य प्रभावी आसन।
7.     आदर्श आहार (Diet): दर्द कम करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं।
8.     बैठने और सोने का सही तरीका: रीढ़ की रक्षा कैसे करें।
प्रस्तावना 

भुजंगासन योग विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आसन है। इसे अंग्रेजी में Cobra Pose कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर की आकृति फन उठाए हुए एक नाग (भुजंग) के समान हो जाती है।

यहाँ भुजंगासन के बारे में संपूर्ण प्रामाणिक जानकारी दी गई है:

1.भुजंगासन किसे कहते हैं?

'भुजंगासन' दो शब्दों के मेल से बना है: 'भुजंग' जिसका अर्थ है सांप (Cobra) और 'आसन' जिसका अर्थ है मुद्रा। इस लिए इसे भुजंगासन कहते हैं। हठयोग के ग्रंथों में इसे रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और जठराग्नि (पाचन शक्ति) को प्रदीप्त करने वाला मुख्य आसन माना गया है।

2.भुजंगासन कैसे करते हैं? (विधि)

  • प्रारंभिक स्थिति: पेट के बल सीधे लेट जाएं। पैरों को सीधा रखें और तलवे ऊपर की ओर रहें।

  • हाथों की स्थिति: अपनी हथेलियों को कंधों के ठीक नीचे जमीन पर रखें। कोहनियों को शरीर के पास रखें।
  • उठना: लंबी गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपने सिर, छाती और फिर नाभि तक के हिस्से को ऊपर उठाएं।
  • दृष्टि: अपनी गर्दन को पीछे की ओर मोड़ें और दृष्टि को आकाश की ओर या दोनों भौहों के बीच (भ्रूमध्य) रखें
  • अंतिम मुद्रा: इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें। कोहनियां पूरी तरह सीधी न करें, उन्हें थोड़ा मुड़ा हुआ रहने दें ताकि कंधों पर दबाव न आए।
  • वापसी: सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे माथे को जमीन पर वापस लाएं।

3. सावधानियां (Precautions)

  • हर्निया या अल्सर के रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान इसे पूरी तरह वर्जित माना गया है।
  • यदि हाल ही में पेट का कोई ऑपरेशन हुआ हो, तो इसे न करें।
  • गर्दन में बहुत अधिक दर्द (Spondylitis) होने पर गर्दन को ज्यादा पीछे न झुकाएं।

4. समयावधि (Duration)

  • शुरुआत में: 15 से 30 सेकंड तक इस मुद्रा में रुकें।
  • अभ्यास होने पर: इसे 1 से 2 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है।
  • इसे एक सत्र में 3 से 5 बार दोहराना सर्वोत्तम परिणाम देता है।

5. कमर दर्द पर प्रभाव और वैज्ञानिक आधार

कमर दर्द पर प्रभाव:

भुजंगासन कमर के निचले हिस्से (Lower Back) की मांसपेशियों को मजबूती देता है। यह रीढ़ की हड्डी की डिस्क (Vertebrae) के संकुचन को दूर करता है, जिससे स्लिप डिस्क और साइटिका जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।

वैज्ञानिक आधार (Scientific Basis):

जब हम पीछे की ओर झुकते हैं, तो शरीर के सामने के हिस्से (Abdominal Muscles) में खिंचाव आता है और पीठ की मांसपेशियों में संकुचन होता है। यह Intra-abdominal pressure को बढ़ाता है, जिससे रक्त संचार (Blood Circulation) बेहतर होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह Adrenal Glands को उत्तेजित करता है और शरीर में 'कोर्टिसोल' (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में मदद करता है।

6. भुजंगासन के प्रमुख लाभ

  •  फेफड़ों की क्षमता: यह छाती को चौड़ा करता है, जिससे ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है।
  •   पाचन तंत्र: कब्ज (Constipation) और गैस की समस्या दूर होती है।
  • तनाव मुक्ति: यह थकान और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है।
  • किडनी और लिवर: पेट के अंगों की मालिश होने से ये अंग बेहतर कार्य करते हैं।
  •  लचीलापन: रीढ़ की हड्डी लोहे जैसी मजबूत और लचीली बनती है। यह कमर दर्द, Spondylitis एवं Slip Disc के लिए लाभकारी है। 
  • विशेष टिप: भुजंगासन करने के बाद हमेशा इसका 'पूरक आसन' जैसे शलभासन या शशांकासन (rabbit Pose) जरूर करना चाहिए ताकि रीढ़ की हड्डी को संतुलन मिल सके।

भुजंगासन के पूरक आसन 

1. शशांकासन

भुजंगासन के तुरंत बाद यह आसन करना सबसे फायदेमंद है।

  •  कैसे करें: घुटनों के बल बैठ जाएं (वज्रासन) और धीरे-धीरे आगे झुकते हुए माथे को जमीन से टिकाएं। हाथों को आगे की ओर फैलाकर रखें।
  • लाभ: यह पीठ की मांसपेशियों को विपरीत दिशा में खींचकर उन्हें पूरी तरह रिलैक्स करता है।
  • विशेष – कमर दर्द की स्थिति मे इस आसन को सावधानी पूर्वक करें ।

2. शलभासन (Locust Pose)

भुजंगासन के बाद इसे करने से पीठ के निचले हिस्से को अतिरिक्त मजबूती मिलती है।

  • कैसे करें: पेट के बल लेटें, हाथों को जांघों के नीचे रखें और बारी-बारी से या एक साथ दोनों पैरों को बिना घुटने मोड़े ऊपर उठाएं।
  •  लाभ: यह साइटिका के दर्द को दूर करने और रीढ़ के निचले हिस्से को शक्तिशाली बनाने में मदद करता है।

3. धनुरासन (Bow Pose)

यदि आप भुजंगासन में सहज हैं, तो धनुरासन इसका अगला चरण माना जाता है।

  • कैसे करें: पेट के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और हाथों से टखनों (Ancles) को पकड़कर शरीर को ऊपर खींचें।
  • लाभ: यह पूरे शरीर के लचीलेपन को चरम पर ले जाता है और पेट की चर्बी कम करने में बहुत प्रभावी है।

4. मार्जरी आसन (Cat-Cow Stretch)

यह रीढ़ की हड्डी को "वार्म-अप" और "कूल-डाउन" करने के लिए सबसे वैज्ञानिक तरीका है।

  • कैसे करें: घुटनों और हाथों के बल 'मेज़' जैसी स्थिति में आ जाएं। सांस लेते हुए कमर को नीचे करें (Cow) और सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोल करें (Cat)
  • लाभ: यह रीढ़ की हड्डी के हर एक मनके (Vertebrae) को खोल देता है।

5. मकरासन

मकरासन (Makarasana) जिसे 'क्रोकोडाइल पोज़' भी कहा जाता हैविश्राम के लिए सबसे प्रभावी योगासनों में से एक है। संस्कृत में 'मकर' का अर्थ 'मगरमच्छ' होता है, क्योंकि इस मुद्रा में शरीर पानी में आराम करते हुए मगरमच्छ जैसा दिखता है। 

मकरासन की विधि (Steps)

इसे करने का सही तरीका नीचे दिया गया है:

  • शुरुआत: जमीन पर योग मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
  • हाथों की स्थिति: दोनों हाथों की कोहनियों को मोड़कर जमीन पर टिकाएं और हथेलियों को चेहरे के नीचे रखकर अपनी ठुड्डी (chin) को उन पर टिकाएं।
  • पैरों की स्थिति: दोनों पैरों को सीधा फैलाएं। एड़ियां एक-दूसरे की ओर और पंजे बाहर की तरफ रखें।
  • श्वास: आंखें बंद करें और सामान्य रूप से गहरी सांस लें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। 

सावधानियां (Precautions)

  • पीठ की गंभीर समस्या: यदि आपको पीठ में बहुत अधिक दर्द या गंभीर चोट है, तो विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसे न करें।
  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को पेट के बल लेटने वाले इस आसन से बचना चाहिए।
  • गर्दन दर्द: यदि गर्दन में तीव्र दर्द हो, तो ठुड्डी को हाथों पर टिकाने के बजाय माथे को हाथों के ऊपर रख सकते हैं। 

मकरासन के लाभ (Benefits)

  • तनाव मुक्ति: यह मानसिक तनाव, चिंता और थकान को कम करने में रामबाण है।
  • पीठ दर्द: स्लिप डिस्क, साइटिका और कमर दर्द में इससे बहुत राहत मिलती है
  • पाचन में सुधार: पेट के अंगों पर हल्का दबाव पड़ने से पाचन तंत्र बेहतर होता है।
  • फेफड़ों की क्षमता: यह फेफड़ों को पूरी तरह फैलने में मदद करता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है।
  • नींद: यह अनिद्रा (insomnia) की समस्या को दूर करने में सहायक है।
  • रक्तचाप नियंत्रण: यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और पूरे शरीर में रक्त संचार में सुधार करने में सहायक है।
  • मासिक धर्म में राहत: यह प्रजनन अंगों की मालिश करता है और पीएमएस (PMS) के लक्षणों को कम कर सकता है।  

विशेष टिप्स (Pro-Tips)

  • पूर्ण विश्राम: अभ्यास के दौरान शरीर के किसी भी हिस्से में तनाव न रखें; शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें।
  • समय: इसे अन्य कठिन आसनों के बाद शरीर को आराम देने के लिए 2-5 मिनट तक किया जा सकता है।
  • एकाग्रता: अपनी सांसों के आने-जाने पर ध्यान केंद्रित करें, इससे मानसिक शांति दोगुनी हो जाती है। 

अभ्यास का सही क्रम (Sequence)

एक संतुलित अभ्यास के लिए आप इस क्रम को अपना सकते हैं:

  • मार्जरी आसन (शरीर को तैयार करने के लिए)
  • भुजंगासन (मुख्य अभ्यास)
  • शशांकासन (आराम देने के लिए - 30 सेकंड)
  • धनुरासन (गहरा खिंचाव देने के लिए)
  • शवासन (अंत में शरीर को शांत करने के लिए)
  • विशेष सुझाव: योग का अभ्यास करते समय हमेशा ध्यान रखें कि "जबरदस्ती न करें"। यदि भुजंगासन करते समय कमर में बहुत तेज चुभन महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं और मकरासन (पेट के बल लेटकर विश्राम करना) में लेट जाएं।

क्या आप कमर दर्द के लिए कोई डाइट चार्ट (खान-पान) भी जानना चाहेंगे जो इन आसनों के प्रभाव को बढ़ा सके? यदि हाँ , तो उसका समाधान यह रहा -

1. सुबह की शुरुआत (Detox)

  •  मेथी का पानी: रात भर एक चम्मच मेथी दाना पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं और बीज चबाकर खाएं। यह जोड़ों के दर्द और सूजन के लिए रामबाण है।
  • लहसुन: खाली पेट 1-2 कली कच्चा लहसुन पानी के साथ निगल लें। लहसुन में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं।

2. मुख्य आहार (Main Diet)

  •  कैल्शियम युक्त भोजन: हड्डियों की मजबूती के लिए दूध, पनीर, रागी (Nachni), और बादाम को शामिल करें
  • प्रोटीन: दालें, सोयाबीन, और अंकुरित अनाज (Sprouts) मांसपेशियों की मरम्मत में मदद करते हैं।
  • सब्जियां: लौकी, तोरई, कद्दू और हरी पत्तेदार सब्जियां खाएं जो आसानी से पच जाएं।

3. 'वात' कम करने वाले मसाले

कमर दर्द में ये मसाले दवाई की तरह काम करते हैं:

  • हल्दी और अदरक: इनमें 'कर्किमिन' होता है जो दर्द निवारक का काम करता है। रात को सोते समय हल्दी वाला दूध (Golden Milk) जरूर पिएं।
  •  अजवाइन: यदि पेट में गैस के कारण कमर दर्द है, तो खाने के बाद थोड़ी अजवाइन और काला नमक लें।

4. क्या न खाएं (Avoid)

  • ठंडी चीजें: फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम या बासी भोजन न करें। यह नसों में जकड़न पैदा करता है।

  • खट्टी और गैस बनाने वाली चीजें: ज्यादा खट्टा दही, इमली, मैदा (Pasta, Pizza), और राजमा/सफेद चने का सेवन रात में न करें।

  • चीनी और नमक: इनका अधिक सेवन शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाता है।

5. कमर दर्द के लिए विशेष 'देसी नुस्खे'

  • गोंद के लड्डू: यदि कमजोरी की वजह से कमर दर्द है, तो बबूल के गोंद के लड्डू बहुत लाभकारी होते हैं।
  •  लहसुन का तेल या अजवाईन : 50 ग्राम सरसों के तेल में 4-5 कलियां लहसुन की या  2 चम्मच अजवाईन  डालकर तब तक उसे गरम करें जब तक ये सुर्ख लाल न हो जाएं,उस तेल से कमर की मालिश करें। भुजंगासन के बाद यह मालिश बहुत सुकून देती है।

एक आदर्श दिनचर्या (Sample Routine):

  • नाश्ता: दलिया या ओट्स और थोड़े सूखे मेवे।
  • दोपहर का भोजन: चपाती (मिश्रित अनाज), हरी सब्जी, दाल और एक कटोरी ताज़ा दही।
  • रात का भोजन: बहुत हल्का भोजन (खिचड़ी या सूप) और सोने से 2-3 घंटे पहले।सावधानी: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं क्योंकि डिस्क (Disc) को हाइड्रेटेड रहने के लिए पानी की जरूरत होती है।

क्या आप कमर दर्द को जल्दी ठीक करने के लिए बैठने या सोने के सही तरीके (Posture) के बारे में जानना चाहेंगे?

1. बैठने का सही तरीका (Sitting Posture)

आजकल 'सिटिंग जॉब' के कारण कमर दर्द की समस्या सबसे ज्यादा है।

  •  पीठ को सहारा दें: बैठते समय आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए। यदि आपकी कुर्सी में 'लम्बर सपोर्ट' नहीं है, तो कमर के निचले हिस्से के पीछे एक छोटा तकिया या तौलिया रोल करके रखें।

पैरों की स्थिति: आपके दोनों पैर जमीन पर सपाट होने चाहिए। घुटने और कूल्हे (Hips) एक ही स्तर पर होने चाहिए। पैरों को क्रॉस करके (Cross-legged) बैठने से बचें।

  • स्क्रीन की ऊंचाई: अगर आप कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो स्क्रीन आपकी आँखों के ठीक सामने होनी चाहिए ताकि गर्दन न झुकानी पड़े।
  • 90-90 नियम: कोहनियों और घुटनों पर 90 डिग्री का कोण बनना चाहिए।
  • ब्रेक लें: हर 30-40 मिनट में एक बार खड़े होकर 2 मिनट के लिए टहलें या 'ताड़ासन' की तरह शरीर को ऊपर खींचें।

·       2. सोने का सही तरीका (Sleeping Posture)

सोते समय रीढ़ की हड्डी का अपने प्राकृतिक कर्व (Natural Curve) में रहना जरूरी है।

  •  पीठ के बल सोना (सबसे बेहतर): यदि आप पीठ के बल सोते हैं, तो घुटनों के नीचे एक पतला तकिया रख लें। इससे कमर का तनाव कम हो जाता है।
  • करवट लेकर सोना: यदि आप साइड में सोते हैं, तो अपने दोनों घुटनों के बीच में एक तकिया रखें। इससे कूल्हे संतुलित रहते हैं और कमर पर खिंचाव नहीं आता।
  • पेट के बल न सोएं: पेट के बल सोने से कमर और गर्दन पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है, इसलिए इसे टालें।
  • गद्दा (Mattress): गद्दा न तो बहुत ज्यादा नरम होना चाहिए और न ही पत्थर जैसा सख्त। मध्यम-सख्त (Medium-firm) गद्दा रीढ़ के लिए सबसे अच्छा होता है।


3. झुकने का सही तरीका (Lifting/Bending)

अक्सर हम भारी सामान उठाते समय सीधे कमर से झुक जाते हैं, जो 'स्लिप डिस्क' का कारण बन सकता है।

 जब भी नीचे से कुछ उठाना हो, तो घुटनों को मोड़कर (Squat की स्थिति में) नीचे जाएं, कमर को सीधा रखें और पैरों की ताकत से ऊपर उठें।

4.कुछ अन्य महत्वपूर्ण सुझाव

  • जूते-चप्पल: बहुत ऊंची हील्स (High Heels) पहनने से शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदल जाता है, जिससे कमर दर्द बढ़ता है। फ्लैट और आरामदायक जूते पहनें।
  • मोबाइल का उपयोग: मोबाइल देखते समय गर्दन को ज्यादा नीचे न झुकाएं, बल्कि मोबाइल को अपनी आँखों के स्तर तक लाएं (Text Neck से बचें)।
  • प्रो टिप: भुजंगासन करने के बाद, जब आप रात को सोएं, तो कमर के नीचे सरसों के तेल की हल्की मालिश करने से मांसपेशियों को रात भर में बेहतर रिकवरी मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) और उनके उत्तर  

  प्रश्न 1: क्या भुजंगासन को रोज करना सुरक्षित है?
उत्तर: जी हाँ, इसे रोजाना सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक लाभदायक होता है।
प्रश्न 2: कमर दर्द में आराम मिलने में कितना समय लगता है?
उत्तर: यदि आप इसे सही तकनीक और सही खान-पान के साथ नियमित रूप से करते हैं, तो 2 से 3 हफ्तों में आपको स्पष्ट सुधार महसूस होने लगेगा।
प्रश्न 3: क्या पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान भुजंगासन कर सकते हैं?
उत्तर: मासिक धर्म के शुरुआती 2-3 दिनों में पेट पर दबाव डालने वाले आसनों से बचना चाहिए। यदि दर्द या असहजता हो, तो आराम करना बेहतर है।
 प्रश्न 4: क्या स्लिप-डिस्क के रोगी इसे कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, भुजंगासन स्लिप-डिस्क में बहुत राहत देता है, लेकिन इसे किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में और बहुत धीरे-धीरे शुरू करना चाहिए।


3. निष्कर्ष (Conclusion)

कमर दर्द आज की भागदौड़ भरी जिंदगी का एक हिस्सा बन गया है, लेकिन योग के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। भुजंगासन न केवल आपकी मांसपेशियों को आराम देता है, बल्कि आपकी रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत भी बनाता है। याद रखें, योग का लाभ तभी मिलता है जब आप इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें। सही आसन, संतुलित आहार और बैठने के सही तरीके को अपनाकर आप एक सक्रिय और दर्द-मुक्त जीवन जी सकते हैं। आज ही अपने स्वास्थ्य के लिए 20 मिनट निकालें और योग की यात्रा शुरू करें।"


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