इस पोस्ट में निम्न रक्तचाप Low Blood Pressure क्या है? इसकी पहचान, कारण, उपाय एवं उपचार, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण, योगासन, प्राणायाम, ध्यान, स्वर विज्ञान से समाधान,एक्यूप्रेसर, घरेलू नुस्खे आदि की विस्तृत जानकारी दी गई है। यह पोस्ट निम्न रक्तचाप की समस्या से ग्रस्त लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी सिध्द होगा।
निम्न रक्तचाप (Hypotension): लक्षण, कारण और बचाव के सही तरीके
निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure), जिसे 'हाइपोटेंशन' (Hypotension) भी कहा जाता है, वह स्थिति है जब आपकी धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य दबाव (120/80 mmHg) से काफी कम हो जाता है। सामान्यतः, यदि बीपी 90/60 mmHg से नीचे चला जाए, तो इसे लो बीपी (Low Blood Pressure) माना जाता है। इस स्थिति में हृदय, मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों को पर्याप्त रक्त नहीं मिलता और इस वजह से निम्न लक्षण दिखाई पड़ते हैं। तरीके
निम्न रक्त चाप के लक्षण -
- सीने में दर्द होना।
- साँस लेने में कठिनाई होना।
- थकान का अनुभव होना।
- अनियमित दिल की धड़कन होना।
- चक्कर आना
- साफ़ दिखाई न देना
- जी मिचलाना
- एकाग्रता में कमी
निम्न रक्त चाप (Low Blood Pressure) होने के संभावित कुछ कारण
- शरीर में पानी की
कमी (Dehydration): जब शरीर में पानी
की कमी होती है, तो रक्त की कुल
मात्रा (Blood Volume) घट जाती है,
जिससे सीधे तौर पर रक्तचाप कम हो जाता है। Cleveland
Clinic के अनुसार, बुखार, उल्टी या अत्यधिक
पसीना आना इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।
- पोषक तत्वों की
कमी: आहार में विटामिन B-12, फोलेट और आयरन की
कमी होने पर शरीर पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) नहीं बना पाता, जिससे एनीमिया होता है और बीपी गिर सकता है।
- हृदय संबंधी समस्याएँ: यदि हृदय की धड़कन बहुत धीमी है (Bradycardia), हृदय के वाल्व में समस्या है या हार्ट अटैक की स्थिति रही है, तो हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता।
- अंतःस्रावी (Endocrine) समस्याएँ: थायराइड की समस्या, एड्रेनल ग्रंथि में कमी (Addison's disease) या लो ब्लड शुगर (Hypoglycemia) जैसी स्थितियां रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को प्रभावित करती हैं।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं में संचार प्रणाली (Circulatory system) तेजी से फैलती है, जिससे पहले 24 हफ्तों में अक्सर रक्तचाप गिर जाता है। यह सामान्यतः प्रसव के बाद ठीक हो जाता है।
- दवाओं का प्रभाव: उच्च रक्तचाप की दवाएं, मूत्रवर्धक (Diuretics), अवसादरोधी (Antidepressants) और पार्किंसंस की कुछ दवाएं भी दुष्प्रभाव के रूप में बीपी कम कर सकती हैं।
इसे कैसे नियंत्रित करें? (उपाय और उपचार)
यदि आपको
लगातार लो बीपी की समस्या रहती है, तो इन उपायों को अपना सकते हैं:- पानी का सेवन बढ़ाएं: दिन भर में पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पिएं।
- नमक की संतुलित मात्रा: डॉक्टर की सलाह पर आहार में नमक की थोड़ी मात्रा बढ़ाएं, क्योंकि सोडियम बीपी बढ़ाता है।
- छोटे-छोटे अंतराल पर खाएं: एक साथ भारी भोजन के बजाय थोड़ा-थोड़ा खाना खाएं।
- अचानक झटके से न उठें: बैठने या लेटने की स्थिति से धीरे-धीरे खड़े हों।
- कॉफी या चाय: तत्काल राहत के लिए एक कप कैफीनयुक्त चाय या कॉफी ली जा सकती है।
- सावधानी: यदि लो बीपी के साथ बेहोशी या छाती में दर्द जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure/Hypotension) को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद और योग का योगदान एवं वैज्ञानिक आधार
1. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण: 'न्यून रक्तचाप'
(Hypotension)
आयुर्वेद में
निम्न रक्तचाप को मुख्य रूप से 'वात' दोष के असंतुलन और 'अग्नि'
(पाचन शक्ति) की कमजोरी से
जोड़ा जाता है।
- वात का प्रभाव: वात दोष रक्त के प्रवाह और तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है। इसका असंतुलन रक्त वाहिकाओं के संकुचन और फैलाव की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे रक्तचाप कम हो जाता है।
- प्रमुख औषधियां : अश्वगंधा (तनाव कम करने और ऊर्जा बढ़ाने हेतु), अर्जुन (हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए), और मुलेठी (द्रव संतुलन बनाए रखने के लिए) सबसे प्रभावी जड़ी-बूटियाँ हैं।
- खान-पान: गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थ जैसे अदरक, काली मिर्च और लहसुन का सेवन रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- नियमित
भोजन: नियमित अंतराल पर छोटे और पौष्टिक भोजन करने से रक्त
शर्करा के स्तर को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है, जो रक्तचाप को
प्रभावित कर सकता है।
- तनाव
प्रबंधन: तनाव निम्न रक्तचाप को बढ़ा सकता है। योग, ध्यान और
प्राणायाम और आयुर्वेदिक तकनीकें तनाव को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
2. योगासन का वैज्ञानिक आधार
योगासन शरीर के 'बैरोरिफ्लेक्स' (Baroreflex) संवेदनशीलता को सुधारते हैं, जो शरीर में रक्तचाप के स्तर को तुरंत नियंत्रित करने वाला प्राकृतिक तंत्र है।
महत्वपूर्ण आसन:
- उत्तानपाद आसन - 3 बार
- पवनमुक्तासन- 3 बार
- पादवृत्तासन- तीन- तीन बार
- नौकासन- 2 बार
- भुजंगासन- 2 बार
- शशांकासन- 3 बार
- मंडूक आसन 3 बार
- ताड़ासन 3 बार
ये आसन रक्त के प्रवाह को मस्तिष्क और हृदय की ओर बढ़ाते हैं। सावधानी: योग विशेषज्ञों के अनुसार, निम्न रक्तचाप वाले
व्यक्तियों को आगे झुकने वाले आसनों (जैसे उत्तानासन) से वापस खड़े होते समय
बहुत धीमी गति अपनानी चाहिए ताकि चक्कर (Orthostatic Hypotension) न आएं।
- उत्तानपाद आसन - 3 बार
- पवनमुक्तासन- 3 बार
- पादवृत्तासन- तीन- तीन बार
- नौकासन- 2 बार
- भुजंगासन- 2 बार
- शशांकासन- 3 बार
- मंडूक आसन 3 बार
- ताड़ासन 3 बार
3. प्राणायाम और श्वसन विज्ञान
प्राणायाम स्वायत्त
तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) को संतुलित करने का काम
करता है।
- भस्त्रिका और कपालभाति: ये प्राणायाम 'सहानुभूति तंत्रिका तंत्र' (Sympathetic Nervous System) को सक्रिय करते हैं, जिससे हृदय गति और रक्तचाप में तत्काल वृद्धि होती है जो लो बीपी के रोगियों के लिए लाभदायक है। भस्त्रिका 5 मिनट और कपालभाति 300 बार करें।
- अनुलोम-विलोम और नाड़ी शोधन : यह शरीर
में ऑक्सीजन के स्तर को संतुलित कर हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाता है। इसे कम से कम 5 से 10 मिनट करें।
- उद्गीथ प्राणायाम: यह तनाव को कम करता है। मष्तिष्क को शांति प्रदान करता है। इसे कम से कम 11 बार करें।
4. ध्यान (Meditation) का प्रभाव
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नियमित ध्यान तनाव हार्मोन 'कोर्टिसोल' के स्तर को कम करता है। हालांकि ध्यान अक्सर बीपी कम करने के लिए जाना जाता है, लेकिन लो बीपी के मामले में यह मानसिक स्थिरता प्रदान करता है जिससे अचानक होने वाली घबराहट और सुस्ती को प्रबंधित करने में मदद मिलती है। ध्यान की अनेक विधियाँ हैं ,शुरुआत में अपना ध्यान अपनी श्वासों पर लगाना चाहिए। जागरूकता पूर्वक प्रत्येक श्वास लें और छोड़ें।
निष्कर्ष: आयुर्वेद और योग केवल लक्षणों का इलाज नहीं करते, बल्कि शरीर की आंतरिक प्राण शक्ति (Vital Energy) को बढ़ाकर रक्तचाप को स्वाभाविक रूप से संतुलित करते हैं।
स्वर विज्ञान-
एक्यूप्रेसर-
2. कान पर जहाँ बाली पहनते हैं, उसके नीचे।
3. हाथ की छोटी उंगली के ऊपरी दोनों पोर पर।
4. अंगूठे के टॉप पर
5. नाभि के चारों ओर
6. पैर के तलवे पर रोल चलाना।
- सुबह एक गिलास पानी में एक चुटकी नमक, एक चम्मच शक्कर एवं एक चौथाई नीबू का रस डालकर पीना।
- प्रतिदिन एक चम्मच तुलसी के पत्ते का रस लेना।
- प्रतिदिन एक चम्मच अमृता रस का सेवन।
- भोजन करते समय छांछ में लवणभास्कर चूर्ण आधा चम्मच मिलाकर घूँट-घूँट कर पीना।
- .10 से 15 किसमिश रात को पानी में भिंगोकर सुबह गर्म दूध के साथ लेना।
- तिल के तेल से प्रतिदिन मालिश करना। तलवों में तेल लगाकर रगड़ना।
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