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अर्द्धमत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana):आसन एक लाभ अनेक

क्या आप Diabetic Patient हैं? क्या आपका पाचन सही नहीं है ? क्या आप रीढ़ की बीमारी से पीड़ित हैं? लीवर और किडनी में समस्याहै ? यदि हाँ , तो अन्य योगासन के साथ अर्द्धमत्स्येन्द्रासन करें। यह पोस्ट अर्द्ध मत्स्येन्द्रासन की सार जानकारी प्रदान करता है।  इसे पढ़े और अपने मित्रों को शेयर करें।    

मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए  अर्द्धमत्स्येन्द्रासन (Half Lord of the Fishes Pose) सबसे महत्वपूर्ण आसनों में से एक है। यह आसन न केवल रीढ़ की हड्डी के लिए अच्छा है, बल्कि यह पेट के आंतरिक अंगों को गहराई से 'ट्विस्ट' (मरोड़ना) करता है, जिससे अग्न्याशय (Pancreas) सक्रिय होता है।

यहाँ इसका विस्तृत विवरण दिया गया है


 अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana)

यह आसन महान योगी मत्स्येन्द्रनाथ के नाम पर रखा गया है। मधुमेह के प्रबंधन में इसे "इंसुलिन सक्रियक आसन"("Insulin activator posture") भी कहा जा सकता है।

करने की विधि (Step-by-Step Guide):

  1. प्रारंभिक स्थिति: जमीन पर पैरों को सामने की ओर फैलाकर सीधे बैठ जाएं (दंडासन)।
  2. पैर की स्थिति: अपने बाएं (Left) पैर को घुटने से मोड़ें और उसकी एड़ी को दाईं (Right) कूल्हे के पास जमीन पर रखें।
  3. दूसरा पैर: अब दाएं (Right) पैर को बाएं पैर के घुटने के ऊपर से ले जाते हुए जमीन पर सीधा खड़ा रखें। आपका दायां पैर अब बाएं घुटने के बाहर की तरफ होना चाहिए।
  4. ट्विस्ट (मरोड़ना): बाएं हाथ को दाएं घुटने के ऊपर से लाएं और दाएं पैर के अंगूठे या टखने (Ankle) को पकड़ने की कोशिश करें।
  5. हाथ की स्थिति: दाएं हाथ को पीठ के पीछे जमीन पर टिकाएं या अपनी कमर पर लपेट लें।
  6. गर्दन की स्थिति: अब धीरे-धीरे अपनी गर्दन और कंधे को दाईं ओर घुमाएं और पीछे की ओर देखें।
  7. समय: इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते हुए 30-60 सेकंड तक रुकें।
  8. वापसी: धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आएं और यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से (पैर बदलकर) दोहराएं। आसन एक लाभ अनेक 

मधुमेह में इसके लाभ (Benefits for Diabetes):

  • अग्न्याशय (Pancreas) की मालिश: जब हम शरीर को मरोड़ते हैं, तो अग्न्याशय पर दबाव पड़ता है। यह दबाव सोई हुई कोशिकाओं को जगाने और इंसुलिन के स्राव को बढ़ाने में मदद करता है।
  • पाचन में सुधार: यह कब्ज को दूर करता है और पाचन शक्ति (जठराग्नि) को बढ़ाता है, जिससे भोजन से ग्लूकोज का अवशोषण बेहतर होता है।
  • लिवर और किडनी: यह लिवर और गुर्दों को उत्तेजित करता है, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकलते हैं।
  • रीढ़ की लचीलापन: यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ दर्द में राहत देता है।

 सावधानियां (Precautions):

  • पीठ की चोट: यदि आपको स्लिप डिस्क या रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट है, तो इसे न करें।
  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • पेट की सर्जरी: यदि हाल ही में पेट का कोई ऑपरेशन हुआ है, तो इससे बचें।
  • हर्निया और अल्सर: हर्निया या पेप्टिक अल्सर के रोगियों को यह आसन किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।

प्रो टिप: इस आसन को करते समय जबरदस्ती शरीर को न मोड़ें। जितना संभव हो उतना ही ट्विस्ट करें। जैसे-जैसे अभ्यास बढ़ेगा, आपका शरीर अपने आप लचीला होता जाएगा। 

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