इस पोस्ट में बंध , बंध का महत्व, इसे कैसे लगाएँ? इसका क्रम क्या है ? इसके वैज्ञानिक आधार, लगाने से लाभ की सारगर्भित चर्चा की गई है। इस लेख को पढ़े, और बंध लगाना सीखें। अपनी ऊर्जा को केन्द्रीभूत करें, रोगों से मुक्त हों।
1. जालंधर बंध (The Throat Lock)
परिचय और विधि
यह 'कंठ' या गले में
लगाया जाने वाला बंध है।
- विधि: गहरी श्वास लें या छोड़ें (प्राणायाम के अनुसार),
रीढ़ सीधी रखें और ठुड्डी (Chin) को छाती के ऊपरी
हिस्से (Jugular notch) से सटा लें।
वैज्ञानिकता और महत्व
- Carotid
Sinus Pressure: यह गर्दन में स्थित 'कैरोटिड साइनस'
पर दबाव डालता है, जो रक्तचाप (BP)
और हृदय गति को नियंत्रित करता है। यह मस्तिष्क को
संदेश भेजता है कि वह शांत हो जाए।
- थायरॉइड
ग्रंथि: यह थायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथियों को
उत्तेजित कर मेटाबॉलिज्म को सुचारू बनाता है।
लाभ
- तनाव और
क्रोध में तत्काल कमी।
- गले के
रोगों और एकाग्रता में सुधार।
2. उड्डियान बंध (The Abdominal Lock)
परिचय और विधि
इसका अर्थ है 'ऊपर की ओर उड़ना'। यह पेट की
मांसपेशियों का संकुचन है।
- विधि: श्वास को पूरी तरह बाहर छोड़ें (बाह्य कुंभक)। पेट को
अंदर की ओर खींचें और नाभि को रीढ़ की हड्डी की ओर पीठ के पीछे ले जाने का
प्रयास करें।
वैज्ञानिकता और महत्व
- Vagus
Nerve Stimulation: यह पेट में स्थित 'वेगस नर्व' को सक्रिय
करता है, जो सीधे हमारे पाचन और मानसिक शांति (Parasympathetic
Nervous System) से जुड़ी है।
- Vacuum
Effect: यह डायफ्राम को ऊपर खींचता है, जिससे फेफड़ों के निचले
हिस्सों की मालिश होती है और 'Dead Air' बाहर निकलती है।
लाभ
- कब्ज,
अपच और मधुमेह (Diabetes) में अत्यंत लाभकारी।
- यह 'मणिपुर
चक्र' को जाग्रत कर आत्मविश्वास बढ़ाता है।
3. मूल बंध (The Root Lock)
परिचय और विधि
यह हमारे शरीर
का आधार स्तंभ है। यह मूलाधार चक्र और पेल्विक क्षेत्र से जुड़ा है।
- विधि: गुदा द्वार और जननांगों के बीच के हिस्से (Perineum)
की मांसपेशियों को ऊपर की ओर खींचना और सिकोड़ना।
वैज्ञानिकता और महत्व
- Pelvic
Floor Strength: यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को टोन करता है,
जो प्रजनन और उत्सर्जन अंगों के स्वास्थ्य के लिए
अनिवार्य है।
- Endocrine
System: यह एड्रिनल ग्रंथियों को प्रभावित करता है, जिससे
जीवन शक्ति और 'Vitality' बढ़ती है।
लाभ
- ब्रह्मचर्य
के पालन और यौन ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बनाने में सहायक।
- अस्थिर मन
को 'ग्राउंडेड' (शांत) करता है।
4. महाबंध (The Great Lock)
जब हम जालंधर,
उड्डियान और
मूल बंध को एक साथ लगाते हैं, तो उसे 'महाबंध'
कहा जाता है।
इसे 'वृद्धावस्था का शत्रु' माना जाता है
क्योंकि यह संपूर्ण अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) को पुनर्जीवित कर देता है।
तुलनात्मक वैज्ञानिक विवरण
|
बंध का नाम |
मुख्य प्रभाव क्षेत्र |
वैज्ञानिक क्रिया (Scientific Action) |
|
जालंधर |
मस्तिष्क और हृदय |
रक्तचाप नियंत्रण और मानसिक शांति (Baroreceptors)। |
|
उड्डियान |
पाचन और मेटाबॉलिज्म |
आंतरिक अंगों की मालिश और वेगस नर्व स्टिमुलेशन। |
|
मूल |
ऊर्जा और प्रजनन |
पेल्विक नर्व प्लेक्सस और एड्रिनल रेगुलेशन। |
समयावधि और सावधानियां
- समय: शुरुआत में हर बंध को 5-10 सेकंड तक रोकें।
धीरे-धीरे क्षमतानुसार बढ़ाएं।
- सावधानी (Warning):
- बंधों का
अभ्यास हमेशा खाली पेट ही करें।
- हृदय
रोगी, उच्च रक्तचाप (High BP) और गर्भवती महिलाएँ
बिना विशेषज्ञ की सलाह के बंध न लगाएं।
- उड्डियान
बंध को मासिक धर्म (Periods) के दौरान न करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
बंध हमारे
स्थूल शरीर (Physical Body) और सूक्ष्म शरीर (Energetic Body) के बीच की कड़ी हैं। ये न
केवल रोगों को ठीक करते हैं, बल्कि कुंडलिनी शक्ति के जागरण के लिए मार्ग प्रशस्त करते
हैं। वैज्ञानिक रूप से, ये हमारे Autonomic Nervous
System को
री-प्रोग्राम (Reprogram) करने की प्राचीन तकनीकें हैं।
FAQs: बंध के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या बंध लगाने से कोई नुकसान हो सकता है?
उत्तर: यदि आप इन्हें गलत तरीके से
या जबरदस्ती श्वास रोककर करते हैं, तो चक्कर आना या बेचैनी हो सकती है। इसे हमेशा क्रमबद्ध
तरीके से (पहले जालंधर, फिर मूल, फिर उड्डियान) सीखना चाहिए।
प्रश्न: क्या मैं केवल एक ही बंध कर सकता हूँ?
उत्तर: हाँ, शुरुआती दौर में एक-एक बंध
का स्वतंत्र अभ्यास करना बेहतर होता है।
प्रश्न: बंध और प्राणायाम का क्या संबंध है?
उत्तर: प्राणायाम ऊर्जा पैदा करता
है, और बंध उस
ऊर्जा को 'लीक' होने से बचाकर
सुरक्षित रखते हैं।
आइए, अब समझते है की इन बंधों को प्राणायाम अभ्यास (जैसे कपालभाति या अनुलोम-विलोम) के साथ कैसे जोड़ कर अभ्यास के लाभ को बढ़ाया जा सकता है।
प्राणायाम और बंधों का संगम वैसा ही है जैसे स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर अपडेट करना—यह आपके सिस्टम की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।
यहाँ एक 'मास्टर सीक्वेंस' दिया गया है जिसे आप अपनी
दैनिक साधना में अपना सकते हैं।
प्राणायाम और बंधों के एकीकरण का क्रम (The Integration Sequence)
इसे हम तीन
चरणों में विभाजित करेंगे:
1. कपालभाति + महाबंध (The Detox & Recharge)
कपालभाति के
बाद बंध लगाना सबसे प्रभावी माना जाता है क्योंकि पेट की मांसपेशियां पहले से ही
सक्रिय होती हैं।
- कैसे
करें: कपालभाति के 20-30 स्ट्रोक करें। अंतिम
स्ट्रोक में पूरी श्वास झटके से बाहर निकाल दें।
- बंध का
प्रयोग: अब श्वास को बाहर ही रोकें (बाह्य कुंभक)। सबसे
पहले मूल बंध लगाएं,
फिर उड्डियान बंध
(पेट अंदर खींचें) और अंत में जालंधर
बंध (ठुड्डी नीचे)।
- अवधि: जब तक आराम से श्वास बाहर रोक सकें, रुकें।
फिर धीरे से बंध खोलें और गहरी श्वास लें।
- लाभ: यह शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को पूरी तरह निकाल देता
है और ऊर्जा को ऊपर की ओर धकेलता है।
2. नाड़ी शोधन + जालंधर और मूल बंध (The Balancing Act)
नाड़ी शोधन में
बंधों का प्रयोग केवल 'अन्तः कुंभक' (श्वास अंदर रोकना) के दौरान किया जाता है।
- कैसे
करें: बाईं नासिका से श्वास लें।
- बंध का
प्रयोग: श्वास अंदर भरकर नाक बंद कर लें। अब जालंधर बंध और मूल बंध लगाएं।
(ध्यान दें: नाड़ी शोधन में 'उड्डियान बंध' नहीं लगाया जाता क्योंकि पेट श्वास से भरा
होता है)।
- वापसी: बंध खोलें और दाईं नासिका से श्वास धीरे-धीरे बाहर
छोड़ें।
- लाभ: यह मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करता है और
फेफड़ों की ऑक्सीजन सोखने की क्षमता बढ़ाता है।
आदर्श दैनिक अभ्यास क्रम (Daily Practice Routine)
|
क्रम |
अभ्यास |
समय |
मुख्य उद्देश्य |
|
1 |
कपालभाति |
5-10 मिनट |
शरीर की शुद्धि (Cleansing) |
|
2 |
महाबंध |
3 राउंड |
ऊर्जा का संचय (Locking Energy) |
|
3 |
अनुलोम-विलोम |
5 मिनट |
मन को शांत करना (Calming) |
|
4 |
नाड़ी शोधन (बंध सहित) |
5 मिनट |
गहरी शुद्धि और संतुलन (Balancing) |
|
5 |
भ्रामरी / ध्यान |
2-5 मिनट |
शून्य की अवस्था (Stillness) |
विशेष सूत्र (Expert Tips)
- बंध खोलने
का नियम: बंध हमेशा नीचे से
ऊपर के क्रम में लगाए जाते हैं (मूल, उड्डियान,
जालंधर) और ऊपर से
नीचे के क्रम में खोले जाते हैं (जालंधर पहले
खोलें, फिर उड्डियान, फिर मूल)। यह ऊर्जा के सुचारू प्रवाह के
लिए अनिवार्य है।
- जबरदस्ती
न करें: श्वास रोकने (कुंभक) में अपनी क्षमता से
बाहर न जाएं। यदि चेहरा लाल हो रहा हो या धड़कन बढ़ रही हो, तो तुरंत
बंध छोड़ दें।
- खाली पेट: इन अभ्यासों के लिए पेट का पूरी तरह खाली होना
अनिवार्य है, अन्यथा उड्डियान बंध से पेट में दर्द हो सकता है।
निष्कर्ष
बंधों के साथ प्राणायाम करने से आपकी एकाग्रता 'लेजर' जैसी तीव्र हो जाती है। यह न केवल शारीरिक रोगों को दूर करता है, बल्कि आपको मानसिक रूप से अभेद्य (Invincible) बनाता है।
याद रखिये,
योग केवल चटाई
(mat) पर किए जाने
वाले अभ्यास तक सीमित नहीं है; यह स्वयं की, स्वयं के
द्वारा, स्वयं तक की यात्रा है। आपने आज जो
भी सीखा है, उसे अपनी
जीवनशैली का हिस्सा बनाएँ।
अभ्यास के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव
जैसे-जैसे आप
इन प्राणायामों और बंधों में कुशल होंगे, आप महसूस करेंगे कि आपका मन अधिक शांत और शरीर
अधिक ऊर्जावान हो गया है। अभ्यास में 'निरंतरता'
(Consistency) ही सफलता की
एकमात्र कुंजी है।
क्या आप बंध के साथ प्राणायाम का अभ्यास कर रहे है ? कमेंट करें।
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